एक बीघा खेत, छोटा सा परिवार
कर्ज पिछले साल का लिए,
हैरान परेशान किसान से पूछो
कानून का क्या होना है।
बिहार का किसान बारिश में बाढ़ से लुटा,
पश्चिम का किसान बारिश के
इंतजार में बैठा, 
उनसे पूछो जरा नए बिल का विरोध
कैसे होना चाहिए।
जरा पूछो बिल कैसा होना चाहिए।
बेटी के ब्याह के लिए खेत बेचते किसान को
रिहाना और ग्रेटा क्या समझेंगे।
क्या समझेंगे उनके पसीने की कीमत
हम जैसे लोग, जो एसी कमरे में,
ऑनलाइन ऑर्डर से सारा काम चला लेते हैं।
कानून तो पढ़ा नहीं, गांव की शक्ल देखी नहीं
पर लेफ्ट राइट करते करते राय जरूर रखते हैं।
आज वास्तविकता से दूर सभी बस मोहरे हैं,
चाल किसी और की पर हारता कोई और है।
                              (भ्रमर)

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